पर्यावरण तथा उसका महत्व-Environment and its importance

पर्यावरण या वातावरण शब्द दो शब्दों से मिलकर बना है – परि+आवरण। परि =चारों तरफ, आवरण = ढके हुए। अर्थात मानव के चारो ओर फैले हुए वातावरण को पर्यावरण में ही रहता है। पर्यावरण द्वारा वह वैयक्तिक एवं सामाजिक क्षेत्रों में विकास करता है। यदि उसे अच्छा वातावरण नहीं दिया जाए तो वह आदर्श मानव के रूप में स्वस्थ नागारिक नहीं बन सकता।

प्रमुख विद्धानों का मत

  • वुडवर्थ के अनुसार – पर्यावरण शब्द का अभिप्राप्त उन सभी बाहरी, शाक्तियों और तत्वों से है, जो व्यक्ति को आजीवन प्रभावित करते हैं।
  • एच. फिटिंग के अनुसार – जीवों के पारिस्थतिक कारकों का योग पर्यावरण है।
  • गिस्बर्ट के अनुसार –पर्यावरण में उन सभी तत्वों को शामिल किया जाता है, जो जैव स्वरूप या वस्तु को निकट में घेरे होते है एवं उन्हे प्रत्यक्ष रूप से प्रभावित करते है।
  • सी.सी.पार्क के अनुसार – मनुष्य एक विशेष स्थान पर विशेष समय पर जिन सम्पूर्ण परिस्थितियों से घिरा हुआ है, उसे पर्यावरण कहा जाता है।
  • आर.एम मैकाइवर –भू-पृष्ठ तथा उसकी समस्त दशाएँ, प्राकृतिक संसाधन, भूमि, जल, पर्वत, मैदान, खनिज, पादक जन्तु आदि तथा प्राकृतिक शाक्तियों जो पृथ्वी पर विद्दमान होकर मानव जीवन को प्रभावित करती है।
  • डगलस एवं रोमन हाॅलैण्ड के अनुसार- पर्यावरण उन सभी बाहरी शाक्तियों एवं प्रभावो का वर्णन करता है, जो प्राणी जगत के जीवन स्वभाव, व्यवहार, विकास, औऱ परिपक्वता को प्रभावित करते है।
  • एनेच एनास्टसी के अनुसार –पर्यावरण वह प्रत्येक वस्तु है, जो जीन्स के अतिरिक्त प्रत्येक व्यक्ति को प्रभावित करती है।

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