पर्यावरण शिक्षा की आवश्यकता एवं महत्व- importance of environmental

पर्यावरण शिक्षा की आवश्यकता एवं महत्व को निम्नलिखित रूपों में स्पष्ट किया जा सकता है-

  • पर्यावरण का मानव के सभी पहुलओं पर प्रभाव होता है। उनका मानव जीनव के विभिन्न रूपो पर प्रभाव एवं महत्व होता है जिससे मावन अपने जीवन के स्थापन को सन्तुलित रूप में रख सके।
  • पर्यावरण पर प्रभाव मानवीय जीवन के सांस्कृतिक, सामाजिक, मनोवैज्ञानिक, राजनैतिक, आर्थिक आदि सभी क्रियाओं पर प्रत्यक्ष रूप से पड़ता है। साथ ही, यह मानव जीवन की प्रकृति, विकास, जीवो के व्यवहार एवं परिपक्वता आदि को भी प्रभावित कर रहा है। इस प्रकार से इसके अध्ययन का महत्व औऱ अधिक हो जाता है कि किस प्रकार से मानव पर्यावरणीय भी प्रभावित कर रहा है।
  • वर्तमान समय में पर्यावरणीय तत्वो का मानव द्वारा अत्यधिक तथा अनियन्त्रित दोहन ने अनेक  पर्यावरणीय समस्याऐँ कर दी है। इससे उसकी गुणवत्ता कम होती जा रही है। अत: इससे पर्यावरणीय शिक्षण का मह्तव अधिक हो गया है कि किस प्रकार मानव पर्यावरणीय प्रभावों से उत्पन्न भयंकर बीमारियों तथा प्राकृतिक आपदाओं से बच सके अथवा विभिन्न भयंकर बीमारियों तथा प्राकृतिक से बच सके अथवा उनका सामना कर सके। इसके लिए पर्यावरण के संरक्षण पर बल उनका सामना कर सके।
  • पर्यावरणीयक्ष अध्ययन मानव को पर्यावरण सूझ का विकास हो सके। साथ ही, पेड़-पौधों, जंगलो, पर्वतों तथा पहाडियों की रक्षा एवं संरक्षण करने का पाठ पढ़ाता है। इनके द्वारा ही जीव जीवित रह सकता है
  • पर्यावरणीय शिक्षा का महत्व वर्तमान में बहुत में बढ़ गया है, क्योकि मनुष्य अपनी सुख-सुविधा की खोज में अपने प्राकृतिक वस्तुओं को विकृत करने में लग गया है।
  • पर्यावरण शिक्षा का प्रमुख कार्य वातावरण से सम्बन्धित समस्याओं को समझ सकने में व्यक्ति की सहायता करना है।
  • पर्यावरण अध्ययन पर्यावरण को संरक्षित करने तथा उसमे व्याप्त प्रदूषण को दूर करने के लिए व्यक्ति में अभिवृति का विकास करता है।
  • पर्यावरणीय अध्ययन पर्यावरणीय समस्याओं के समाधान हेतु व्यक्तियों में आवश्यक कौशल उत्पन्न करता है

पर्यावरणीय क्षशिक्षा का क्षेत्र या स्वभाव

  1. पर्यावरण भौतिक, सामाजिक तथा जैविक तत्वों, दशाओं, प्रभावों क्रियाओं तथा अन्तक्रियाओं का प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप में एक संगम या  मिश्रण है। इसकी प्रकृति बहु-अनुशासनीय होती है। अत: पर्यावरण वह मूलभूत विश्व का मौलिक आधार कहा गया है। पर्यावरण वह  मूलभूत आधार प्रस्तुत करता है। जिसके द्वारा पृथ्वी पर मानव तथा अन्य जीवों का जन्म होता है। यदि पृथ्वी पर वातावरण स्ववस्था बलवती होती जाती है जैसे- चन्द्रमा पर कोई वातावरण नहीं है, वहाॅं जीवन की कोई सम्भावना नहीं की जा सकती
  2. पर्यावरणीय अध्ययन क्षेत्र मानव तथा जीवों की प्राथमिकताओं का सार होता है; जैसे जिसके द्वारा मानव जीवित रहता है, संसाधन जो अर्थव्यवस्था, सामाजिक व्यवस्था, राजनीतिक व्यवस्था आदि को प्रदान करता है। अत: इन समस्त कारको की गुणवत्ता पर्यावरणीय अध्ययन के द्वारा ही प्राप्त होती है। पर्यावरणीय शिक्षा क्षेत्र की प्रकृति में निम्नलिखित पहलुओं का समावेश होता है, जो निम्नलिखित है –Please wait ….अभी साइट Updation पर है।

 

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