पर्यावरण अध्ययन

पर्यावरण एक बहुआयामी विषय है। आज भारत ही नहीं सम्पूर्ण विश्व में पर्यावरण अध्ययन की आवश्यकता महसूस की जा रही है। हमारा देश भी इस क्षेत्र में अग्रणी है इसके सार्वभौतिक महत्त्व को देखते हुए विश्वविद्यालय अनुदान आयोग ने स्नातक स्तर पर इस पाठ्यक्रम को अनिवार्य कर दिया है। महात्मा गाँधी काशी विद्यापीठ में सत्र 2003-04 से इस पाठ्यक्रम का अध्यापन भी प्रारम्भ हो गया है।
डॉ. त्रिपाठी द्वारा लिखी गयी यह पुस्तक सरल एवं बोधगम्य राष्ट्रभाषा में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के पाठयक्रम के अनुसार है जो पर्यावरण के क्षेत्र में एक महत्त्वपूर्ण कृति है। यह छात्रों के ‘‘पर्यावरण अध्ययन’’ पाठ्यक्रम की आवश्यकताओं की पूर्ति करने के लिए सक्षम है। पुस्तक में विषयानुसार छाया-चित्र, आरेख एवं सारणियों के माध्यम से समझाया गया है। स्नातक स्तरीय छात्रों को ध्यान में रखकर तैयार की गयी इस पुस्तक के लेखक ने विषय सामग्री को सरल व रोचक बनाने का प्रयास किया है।

पर्यावरण अध्ययन पढ़े

पर्यावरण अध्ययन पूरी तरह से समझे

यह पुस्तक पर्यावरण, प्राकृतिक संसाधन, पारिस्थितिक तंत्र, जैव-विविधता एवं प्रदूषण की मूल अवधारणों को समझाने में सक्षम है। इसके अध्ययन से पर्यावरणीय ह्नास के मूल कारणों का ज्ञान हो सकेगा, जो पर्यावरण संरक्षण में हितकर सिद्ध होगा। इस पुस्तक के पढ़ने से लेखक के पर्यावरण विषय पर व्यापक अध्ययन का परिचय मिलता है।
आज की आवश्यकता है प्रत्येक व्यक्ति पर्यावरण की जानकारी रखे, इसे क्षतिग्रस्त होने से रक्षा करे तथा इसके उत्थान में भागीदार बने। विभिन्न मानवीय क्रियाकलापों ने पर्यावरण संकट इस प्रकार से उत्पन्न  कर दिया है जिसने सम्पर्ण मानव समाज को इस दिशा में सोचने के लिए बाध्य कर दिया है। आज पर्यावरण व मानव जाति के बिगड़ते संबंधों को सुधारने की आवश्यकता है। यह पुस्तक हिन्दी माध्यम से पर्यावरण शिक्षण के छात्रों एवं अध्यापकों के लिए समान रूप से महत्त्वपूर्ण है। मैं इस कार्य के लिए लेखक को बधाई एवं शुभकामनाएँ देता हूँ।

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