भारत में प्रमुख किले / महल-Major forts / palaces in India

सिटी पैलेस-

सिटी पैलेस, राजस्थान के उदयपुर में स्थित एक प्रमुख ऐतिहासिक स्थल है और सबसे प्रसिद्ध ऐतिहासिक पर्यटन स्थलों में से भी एक है. यह पैलेस राजस्थानी व मुगल शैलियों की मिश्रित रचना है, जिसका निर्माण महाराजा सवाई जयसिंह न े 1729 ई. से 1732 ई. के मध्य कराया था। सिटी पैलेस एक बड़े क्षेत्र में विस्तृत है, जो जयपुर के पुराने शहर का सातवाॅं हिस्सा है तथा पुराने शहर की दिवार के मध्य में स्थित है। इस विस्तृत परिसर में कई भवन, आँगन एवं उद्दान/बाग शामिल हैं। त्रिपोलिया गेट, वीरेन्द्र पोल और उदय पोल इस महल के मुख्य तीन द्धार है। इसके अतिरिक्त इस पैलेस में चन्द्र महल और मुबारक महल के नाम से प्रमुख महल भी हैं।

 

मेहरानगढ़ का किला

मेहरानगढ़ का किला राजस्थान के जोथपुर शहर में स्थित है। यह किला भारत के प्राचीनतम किलों में से एक है और भारत के समृद्धशाली अतीत का प्रतीक है। इस किले का निर्माण राव जोधा द्धारा 1459 ई. में कराया गया था, जब उन्होने अपनी राजधानी मन्दौर से यहाॅं स्थानान्तरित की थी। यह विशालकाय किला पथरीली चट्टटान/पहाड़ी पर मैदान से 125 मी की ऊँचाई पर स्थित है और सात दरवाजों एवं अनगिनत बुर्जों से युक्त 10 किलो लम्बी ऊँची दिवारों से घिरा है। लाल बालू पत्थर से निर्मित इस किले के अन्दर कई भव्य महल, अद्भूत नक्काशीदार दरवाजे, नालीदार खिडकियाॅं और प्रेरित करने वाले नाम है;  यथा-फूल महल, मोती महल, शीला महल, दौलत खाना आदि। इस किले के अन्दर महारानी पद्मावती की स्मृति में सती माता का मन्दिर बनवाया गया है।

मैयूर का महल

मैयूर का महल कर्नाटक राज्य के मैयूर जिले में स्थित है औऱ इसका भारत में अपने प्रकार का सबसे बड़ा महत्व है तथा यह प्रमुख भव्य महलों में से एक है। इस महल का निर्माण पुराने लकड़ी के महल के स्थान पर वर्ष 1912 में वोडेयार के 24वें राजा द्वारा कराया गया था, जो वर्ष 1896 में टूट गया था। यद्दपि इसका निर्माण कार्य वर्ष 1897 में ही शुरू हो गया था। इस महल का डिजाइन तत्कालीन मद्रास राज्य के ब्रिटिश सलाहकार वास्तुकार हेनरी इरविन ने किया था। भारतीय सारसेनिक शैली में गुम्बर्दो, प्राचीरों, आर्च तथा कोलोनेड के साथ निर्मित यह महल अपनी भव्यता के कारण ब्रिटेन के बकिंघम पैलेस  के साथ तुलना में शुमार किया जाता है। कल्याण मण्डल की काॅंच से बनी छत, दीवारों पर लगी तस्वीरें और स्वर्णिम सिंहासन इस महल की प्रमुख विशेषताएँ हैं।

लाल किला

युनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल यह किला विश्व के सर्वाधिक प्रभावशाली भव्य महलों में से एक है इस ढाॅंचे से जुड़ा इतिहास मुगल राजशाही औऱ अंग्रेजों के संघर्ष की दास्तान भी बयां करता है। दिल्ली में स्थित इस किले का निर्माण लाल पत्थरों से किया गया है, जिसके कारण इसे लाल किला कहा जाता है। इस किले का निर्माण मुगल शासक शाहजहाॅं (1618 ई. तैयार) ने करवाया था. लगभग डे़ढ़ मील में विस्तृृत यह किला अनियमित अष्टभुजाकार आकार में बना है और इसके दो प्रवेश द्धार है- एक लाहौर गेट औऱ दूसरा दिल्ली गेट इस भव्य किले के अन्दर पर्यटकों के लिए कई खूबसूरत व रमणीय कलाकृतियाॅं मौजूद है, जो आश्चर्य के साथ ही इतिहास के प्रति गौरवान्वित होने का अनुभव देती हैं।  इनमें दीवाने-ए-आम, संगमरमर से बने भव्य महल, मस्जिद, बगीचे और आलीशान महल शामिल हैं। इस ढ़ाॅंचे में भारतीय, यूरोपीय और फारसी वास्तुकला का बेहतरीन मिश्रण देखने को मिलता है। स्वन्त्रता के पश्चात से लाल किले पर स्वतन्त्रता दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री झण्डारोहण एवं राष्ट्र को सम्बोधित करते है।

चित्तौड़गढ़ किला

युनेस्को के विश्व विरासत सूची में शामिल यह किला भारत के सबसे बड़े किलो में से एक है। यह किला राजस्थान के चित्तौड़गढ शहर में स्थित है, जो पूर्व में मेवाड़ राजाओं की राजधानी थी। इस किले का निर्माण मौर्यवंशीय राजा चित्रांगद मौर्या ने 7वीं शताब्दी मं करवाया था, किन्तु 738 ई. में राजपूत शासक राजा बज्पा रावत ने किले पर अपना अधिकार कर लिया था। वर्तमान में यह  पर्यटकों के लिए प्रमुख आकर्षक का केन्द्र है।

चित्तौड़गढ़ किला पूर्व क राजपूतों की वीरता और सम्मान की कथा का व्याख्यान वयां करता हैं। यह किला 700 एकड़ में विस्तृत तथा 13 किमी की परिधि में साथ ही किले में  1 किमी लम्बी सड़क है जो सात द्धारो से होकर गुजरती है, किले का अन्तिम और मुख्य दरवाजा राम द्धार है। इस किले में चार महल, 19 मन्दिर, जिनमें जौन और हिन्दू मन्दिर शामिल है 20 जल निकाय तथा चार स्मारक है

 

Quiz Matched Content(quiz_matched_content)
सभी सरकारी नौकरी की तैयारी करे वो भी घर बैठे सिर्फ QuestionExam फेसबुक पेज Like करके।
Tags : चित्तौड़गढ़ किला, प्रमुख किले, मेहरानगढ़ का किला, मैयूर का महल, लाल किला, सिटी पैलेस
Comments

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *